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शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2009

जैविक खेती की मुख्य आवश्यकता"केंचुआ खाद"

हम देखते हैं कि बरसात में केंचुए निकलते हैं. ये मल को खाकर मिटटी बनाते हैं. जब हम गाँव में रहते थे थे तो बच्चे बहुत सारे केंचुए पकड़ कर उसे कांटे में लगा कर मत्स्याखेट करते थे, गांवों में केंचुओं को मछली पकड़ने के लिए कांटे में लगा कर चारे के रूप में उपयोग में लिया जाता है, केंचुआ किसानो के लिए मित्र है, इसे "प्रकृति प्रदत्त हलवाहा"भी कहा जाता है. भारत वर्ष में केंचुओं की ५०६ प्रजातियाँ पाई जाती हैं, इनसे वर्मी कम्पोस्ट खाद (केंचुआ खाद) बनता है, इनमे इपीजीइक श्रेणी के केंचुए अपने भोजन, प्रजनन एवं आवासीय विशेषताओं के लिए खाद के लिए उपयोगी मने जाते हैं, इनको सुपर वारं भी कहा जाता है, ये केंचुए मिटटी कम और कार्बनिक पदार्थ ज्यादा खाते हैं, इनका वजन ०.३ से ०.६ ग्राम तक एवं लम्बाई लग-भग ३ इंच होती है.
केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट)
केंचुए कम सड़े कार्बनिक पदार्थों को भोजन के रूप में ग्रहण कर मल -विष्ठा करते हैं उसे वर्मी कास्टिंग कहते हैं, और इनसे प्राप्त इस मल को वर्मी कम्पोस्ट या केंचुआ खाद कहते हैं.
कृषि के उत्पादन वृद्धि में केंचुआ खाद उपयोगी पदार्थ.
  1. कृषि से प्राप्त कूड़ा-कचरा:- अधसड़े पौधों के डंठल, पत्तियां, भूसा, गन्ने की खोई, खरपतवार, फूल, सब्जियों के छिलके,केले के पत्ते, तने, पशुओं के गोबर मूत्र, एवं गोबर गैस का कचरा, सब्जी मंदी का कचरा, रसोई का कूड़ा कचरा आदि से केंचुए की खाद बने जा सकती है.
  2. कृषि उद्योग से प्राप्त कूड़ा-कचरा:- फल प्रसंस्करण इकाई, तेल शोधक कारखाने, चीनी उद्योग, बीज प्रसंस्करण, तेल मीलों एवं नारियल उद्योग आदि के कचरे से भी केंचुआ खाद का निर्माण किया जा सकता है.
  3. गोबर:- ऊपर लिखे पदार्थों को अधसड़े गोबर से मिश्रित कर देने से केंचुआ खाद शीघ्र एवं उत्तम श्रेणी की बनती है, केंचुओं को गोबर एवं पट्टी का मिश्रण अति प्रिय है.
केंचुआ खाद में न डालने योग्य:- पनीर , हड्डी व मांस, तेल, नमक, मिर्च व तेल मसाले, एवं गर्म पदार्थ, इनसे केंचुए मर सकते हैं.
अगले अंक में "केंचुआ खाद" उत्पादन विधि बताई जायेगी.
आज पढिये "रेल दुर्घटना की कहानी-मेरी अपनी जुबानी"
(चित्र-गूगल से साभार)

3 टिप्पणियाँ:

आमीन 23 अक्तूबर 2009 को 5:58 pm  

कृषि पर जानकारियाँ ब्लॉग पर देना अच्छी शुरुआत है.. धन्यवाद

अनुनाद सिंह 23 अक्तूबर 2009 को 6:27 pm  

शर्मा जी,

आपका हिन्दी चिट्ठाकारी में स्वागत है। खुशी की बात है कि हिन्दी चिट्ठाकारी में आप जैसे योग्य व्यक्ति भी अब उतर गये हैं।

ब्लाग पर उपयोगी जानकारी देने के साथ-साथ आपसे आग्रह है कि हिन्दी विकि (जो कि एक मुक्त विश्वकोश है) पर भी कृषि एवं बागवानी के विषयों पर कुछ लेखों का योगदान करते रहें। भविष्य में हिन्दी विकि (hi.wikipedia.org/), हिन्दी के लिये वरदान सिद्ध होने वाली है। किन्तु इसके लिये इसमें अच्छेछे लेखों का योगदान करना बहुत जरूरी है। आशा है आप मेरे अनुरोध पर विचार करेंगे।

जी.एल. शर्मा 11 जुलाई 2010 को 7:07 pm  

@अनुनाद सिंह

शोधकार्य में व्यस्त होने के कारण
ब्लाग पर समय बहुत कम मिल पाता है।
समय मिलने पर आपकी सलाह पर काम किया जा सकता है।

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